जबकि कोलीवुड (Kollywood) ने इस व्यक्ति के बारे में फिल्म बनाने पर ध्यान नहीं दिया, जिन्होंने लागत प्रभावी सैनिटरी नैपकिन (Sanitary Napkin) बनायी है, बॉलीवुड ने इस अवसर को अपने हाथ से नहीं जाने दिया है। अरुणाचलम मुरुगनंतम (Arunachalam Muruganantham), जो लागत प्रभावी सैनिटरी पैड बनाने के विचार से ग्रस्त प्रर्वतक थे, के प्रेरणादायक जीवन पर आधारित अक्षय कुमार (Akshay Kumar) की फिल्म “पैडमैन” (Padman) के ट्रेलर को अभी तक 20 लाख से अधिक लोगों ने देखा है। फिल्म में राधिका आपटे और सोनम कपूर ने भी मुख्य भूमिकाएं निभाई हैं।

ऐसे देश में जहाँ माहवारी के बारे में अभी भी एक शर्मनाक रहस्य के रूप में बात की जाती है, “पैडमैन” कोयम्बटूर (Coimbatore) के एक ऐसे व्यक्ति की असाधारण यात्रा के बारे में बात करती है, जिन्होंने ग्रामीण भारत में गरीब महिलाओं को कम लागत वाले सैनिटरी नैपकिन प्रदान करने को अपने जीवन का उद्देश्य बना लिया है। हालांकि मुरुगनंतम वैसे तो तमिलनाडु से हैं लेकिन फिल्म “पैडमैन” मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की पृष्ठभूमि पर बनाई गई है।

मुरुगनंतम, जिन्हें “भारत का माहवारी आदमी” (India’s Menstrual Man) भी कहा जाता है, का व्यापक रूप से भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय मीडिया द्वारा प्रलेख और रिपोर्ट दोनों किया गया है। ट्विंकल खन्ना (Twinkle Khanna) ने अपनी नई किताब द लेजेंड ऑफ लक्ष्मी प्रसाद (The Legend Of Lakshmi Prasad) में “द सैनिटरी मैन फ्राम अ सेक्रेट लैंड” (The Sanitary Man from a Sacred Land) की कहानी को इन पद्म श्री विजेता पर आधारित किया है। “पैडमैन” द ऑक्सफ़ोर्ड यूनियन (The Oxford Union) में प्रदर्शित होने वाली पहली भारतीय फिल्म होगी।

1998 में, जब अरुणाचलम मुरुगनंतम ने अपनी पत्नी को सैनिटरी पैड के बजाय पुराने कपड़ों का उपयोग करते हुए देखा तो उन्होंने एक प्रतिमान बनाया जो बिल्कुल असफल रहा। इसके बाद, उन्होंने विभिन्न सामग्रियों का इस्तेमाल किया और हर महीने सैनिटरी पैड के नए मॉडल बनाने की कोशिश की। चूंकि उनकी पत्नी द्वारा परीक्षण किए गए प्रत्येक प्रतिमान के बीच एक महीने का अंतर था, इसलिए पास के मेडिकल कॉलेज के कुछ स्वयंसेवकों से पूछने के अलावा उनके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं था। हालांकि कुछ महिला छात्रों ने उन्हें इसके लिए कोशिश करने पर सहमति व्यक्त की, हालांकि, उन्हें सही प्रतिक्रिया देने के लिए वह बहुत ही शर्मीली थीं। इसलिए मुरुगनंतम ने स्वयं ही इसे जांचने का फैसला किया।

उन्हें सही सामग्री ढूंढने और उसे संसाधित करने के लिए एक तरीका ढूँढने के लिए दो साल लग गए। इसका परिणाम कम लागत वाली सैनिटरी पैड बनाने के लिए एक आसान उपयोग वाली मशीन थी। परिणामस्वरूप, महिला समूह या विद्यालय अपनी मशीन खरीद सकते हैं और अपने सैनिटरी पैड का उत्पादन स्वयं कर सकते हैं और अधिशेष को बेच सकते हैं। इस तरह, मुरुगनंतम की मशीन ने ग्रामीण भारत में महिलाओं के लिए रोजगार पैदा किए हैं। उन्होंने अपने देश में एक क्रांति शुरू की, 27 राज्यों को 1,300 मशीनें बेची और हाल ही में उन्हें दुनिया भर में विकासशील देशों में निर्यात करना भी शुरू कर दिया है।

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2014 में टाइम पत्रिका (Time magazine) ने उन्हें दुनिया के 100 सबसे प्रभावशाली लोगों में से एक के रूप में दिखाया था। “पैडमैन” के ट्रेलर को देखकर यह स्पष्ट हो जाता कि इस फिल्म को देखने के बाद मासिक धर्म की स्वच्छता के आसपास चर्चा सामान्य हो जाएगी। हम आशा करते हैं कि मासिक धर्म के बारे में बात करना अब कोई शर्म की बात नहीं बल्कि आवश्यक चर्चा का विषय बन जाएगा।

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